नहीं रहे एसीबी के हीरो !

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(श्रीपाल शक्तावत)
“जिन्दगी तो हजार साल की भी कम होती है । मैं जल्द निकल भी गया तो क्या ? एक सुकून के साथ तो जाऊंगा कि मैं बिका नहीं, डिगा नहीं । मैंने मेरा काम पूरी निष्ठा और ईमानदारी से किया । बच गया तो और काम करेंगे ।” ये शब्द मेरे कानों में गूंज रहे हैं और मैं गमजदा परिवार को लिए उनके उसी गांव की डगर पर हूं,जो उनकी रग रग में बसता था ।
बीते एक दशक से राजस्थान में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी मुहिम में अगुवा रहे  पुलिस इंसपेक्टर विक्रम सिंह जी शेखावत आज कैंसर से जीवन की जंग हार गए।

1976 मेँ सीकर जिले के खुडी -लक्षमनगढ में जन्मे विक्रम सिंह बीते दस सालों से एंटी करपश्न ब्यूरो में चुपचाप काम करते हुये कई घोटालों को खोलने ,कई नामी गिरामी, बड़ी पहुँच वाले आईएएस ,आईपीएस ,जज ,जैसे ओहदेदार घूसखोरों को जेल भिजवाने में सुत्रधार बने। 
एसीबी मेँ पदस्थ रहे हर ड़ीजी ,एडीजी ,आईजी य़ा अन्य साथियों की अपने काम की बदौलत जरूरत और पसंद रहे विक्रम सिंह 6 जून की रात अचेत हुए थे। मुम्बई टाटा से इलाज कराया। फिर अभी नारायणा अस्पताल में भर्ती थे।  उनके अंतिम समय मे  हम सब इस जांबाज मित्र को वेंटिलेटर पर एक एक सांस के लिए संघर्ष करते हुए बेबस होकर देख रहे थे।  हम सब ईश्वरीय सत्ता के आगे असहाय होकर अपनी आंखों के सामने पल पल घुट घुट कर जी रहे दोस्त को मौत के आगोश में धीरे धीरे जाते हुए देखते रहे। बेबस और लाचार होकर हम विक्रम सिंह जी को उनका हाथ थामकर अपने आंसू चुपचाप पीते रहे और जल्दी ठीक होने की उम्मीद पालते  रहे। 
बीते सालों में ब्यूरो द्वारा की गयी कार्यवाही और अदालतों में पेश चार्जशीट पर गौर करें तो करप्ट सिस्टम के लिए काल साबित होते रहे विक्रम सिंह शेखावत को आप भी सलाम किये बिना नहीं रहेंगे. 
विक्रम सिंह की कुछ कार्यवाहियां काबिले गौर रही -मसलन –Deputy Secretary Home Anil Paliwal trap case-INC advisor Mahesh Sharma trap case- SP Ajmer Rajesh Meena trap case-Distt.Session Judge Ajay Sharda case-11 cases of nakli desi ghee -SP Kotta city Satveer Singh trap case-Senior  IAS Ashok Singhvi mining corruption case-  NRHM corruption cases – PHED corruption case  
जैसे कई बडे़ भ्रष्टाचार के मामलों का खुलासा करने मे अहम कडी बने विक्रम सिंह जी करीब दस साल पहले कोटा में अपने ही अफसरों की साजिश का शिकार हो नौकरी छोड़ खेती बाड़ी का मन बना चुके थे लेकिन फिर एंटी करप्शन ब्यूरो में आये और ईमानदार अफसरों का आशीर्वाद मिला तो सर्विलांस के बूते करप्ट सिस्टम के लिए काल बनते चले गए. हालांकि इस दौरान उन्हें ऐसे लोगों ने जी भर दिल पर जख्म भी दिये जिन्हें वह अपने परिजनों से ज्यादा सम्मान देते रहे ।
विक्रम सिंह जी के पिताजी शिवपाल सिंह शेखावत ने भी थानाधिकारी थाना बगड़, जिला झुंझुनू के पद पर रहते हुए पुलिस और देश की सेवा में अपराधियों से संघर्ष करते हुए शहादत दी थी।
विक्रम सिंह जी को एक अफसोस जरूर सालता रहा-“गोली से मौत की आशंका तो थी,लेकिन ये बीमारी मुझे घेर लेगी,ऐसा कभी नहीं सोचा ।”

(श्रीपाल शक्तावत)

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