सूचना के अधिकार के 15 वीं वर्षगाँठ, पारदर्शिता के क्षेत्र में कईं कदम चलना बाकी !

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(जयपुर,12 अक्टूबर2019)
देश में सूचना के अधिकार के लिए एक लंबा आंदोलन हुआ जिसकी शुरुआत मध्य राजस्थान से हुई और उसके बाद राजस्थान में सन 2000 में सूचना का अधिकार कानून बना और पूरे देश के लिए 2005 में यह कानून देश की संसद के द्वारा बनाया गया और इसे 12 अक्टूबर 2005 से लागू किया गया ।
राष्ट्रीय स्तर के सर्वे के अनुसार देश के करीब 60 लाख लोग सूचना का अधिकार का प्रयोग करते है।  यह संख्या  किसी देश में सूचना के अधिकार के प्रयोग में सबसे ज्यादा है।

राजस्थान में जन सूचना पोर्टल का शुभारंभ
हाल में ही राजस्थान सरकार ने धारा 4 के क्रियान्वयन में एक कदम आगे बढ़ाया है । इसके लिए सरकार इसके विभागों की सभी सूचनाएं जो जनता के लिए उपयोगी हैं, को अपने आप प्रदर्शित करने हेतु जन सूचना पोर्टल बनाया है जिस पर अभी 14 विभागों की 27 सेवाओं से संबंधित सूचनाओं को सार्वजनिक तौर पर आम जनता के सामने रख दिया है। अभी इस पोर्टल पर काम चल रहा है , राज्य सरकार के बहुत कम विभाग ही इस पोर्टल पर आए है।  बचे हुए सभी विभागों की समस्त सूचनाओं को इस पोर्टल पर लाना है। इसलिए हम राज्य सरकार से यह मांग करते हैं कि वह जल्द से जल्द सभी विभागों की सभी सूचनाएं इस पोर्टल पर आम जन के लिए उपलब्ध कराए।

राज्य सूचना आयोग में मुख्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति तुरंत की जाए
राजस्थान सरकार पारदर्शी सरकार होने का दावा करती है तथा सूचनाएं जनता को स्वतः ही देने के बारे में कहा जा रहा है लेकिन पिछले 6 माह से राज्य में मुख्य सूचना आयुक्त  का पद खाली है और आज तक नियुक्ति नहीं की गई है  जिसकी बजह से जयपुर जिले की अपीलों की सुनवाई नही हो रही है। यह सरकार की प्रतिबद्धता की कमी को दर्शाता है। इसलिए हम मांग करते हैं कि राज्य सरकार राज्य में मुख्य सूचना आयुक्त सहित अन्य सूचना आयुक्तों की नियुक्ति करे जिससे अपीलों का निपटारा समय पर हो सके।
ऑनलाइन सूचना मांगने की व्यवस्था अधूरी
राजस्थान सरकार ने ऑनलाइन सूचना मांगने के की प्रक्रिया 2012 में चालू की परन्तु आज 7 साल के बाद भी केवल 25 कार्यालय ही ऑनलाइन सूचना के आवेदन स्वीकार करते हैं जबकि राज्य में 30 हजार से अधिक लोक सूचना अधिकारी कार्यालय होंगे जिनको ऑनलाइन सूचना देने की व्यवस्था व्यवस्था करनी चाहिए। अतः राज्य सरकार से मांग करते हैं कि सभी विभागों के सभी लोक सूचना अधिकारियों के कार्यालय में ऑनलाइन सूचना दिए जाने की व्यवस्था की जाए।

राज्य में सूचना के अधिकार की नोडल एजेंसी नही कर रही है निगरानी व क्रियान्वयन
राज्य में प्रसाशनिक सुधार विभाग सूचना के अधिकार कानून के क्रियान्वयन की नोडल एजेंसी है परंतु यह विभाग इस पर ध्यान नही के बराबर दे रहा है । प्रथम अपील अधिकारी सूचना दिलवाने में महती भूमिका निभा सकता है परंतु यह अपीलीय अधिकारी बेपरवाह है क्योंकि कानून में उसको कोई सजा नही है , लेकिन यदि प्रशाशनिक सुधार विभाग इस प्रवृत्ति को बदलवाने का प्रयास करे तो सूचना प्राप्ति में आसानी हो सकती है।

सूचना के अधिकार का प्रयोग करने वालो को मिले सुरक्षा
बाड़मेर जिले के प्रहरी जगदीश गोलिया की 6 अक्टूबर 2019 को पुलिस कस्टडी में मौत हो गई । जगदीश पारदर्शिता की लड़ाई के सच्चे प्रहरी थे उन्होंने 65 से ज्यादा ऑनलाइन RTI लगाई व 100 से अधिक ऑफ़लाइन RTI आवेदन किये थे । अभी जांच चल रही है पर प्रथम द्रष्टया यह विसल्ब्लोअर होने की सजा मिली है । सरकार से हमारी मांग है कि उसके सभी सूचना के अधिकार मामलों की राज्य स्तर पर जांच की जावे।

पारदर्शिता लाने का प्रयास सतत व संघर्षमय है
पारदर्शिता के लिए सभी नागरिकों को लगना होगा । केवल सूचना मांगने से ही काम नहीं चलेगा बल्कि इसके लिए लगातार संघर्ष करना होगा। यह सूचना के अधिकार कार्यकर्ता, उपयोगकर्ता तक सीमित नहीं होना चाहिए क्योंकि सरकारी पारदर्शिता प्रत्येक नागरिक के लिए बहुत जरूरी है।
पारदर्शिता के साथ जवाबदेही सुनिश्चित करे सरकार
छोटे-छोटे काम के लिए साधारण लोग सरकारी दफ्तरों के कई बार चक्कर लगाते हैं तब भी उनका काम नहीं होता है फिर उससे बड़े अधिकारी के पास जाते हैं और यह सिलसिला चलता रहता है और इसमें कई वर्ष भी लग जाते हैं लेकिन काम नहीं होता है। इसलिए सरकारी कर्मचारियों, अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित की जाए इसके लिए राज्य में लंबे समय से कानून की मांग चल रही है ।  इसलिए राज्य में बजट भाषण के दौरान मुख्यमंत्री महोदय ने सार्वजनिक जवाबदेही लाने की घोषणा की है। उसके लिए पूर्व प्रशासनिक अधिकारी रामलुभाया की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया है। सरकार से हमारी मांग है कि राज्य में जल्द जवाबदेही कानून लाये जाए जिससे आम जनता को राहत मिल सके।

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