2 अप्रैल के केस वापस लेने बाबत जयपुर में धरना प्रदर्शन 20 जुलाई को 

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( डॉ दशरथ हिनूनिया )
 2 अप्रैल 2018 के भारत बंध जन आंदोलन में जो दलित आदिवासी तबके के लोगों पर फर्जी और झूठे केस बनाए गए हैं ,उन सबको वापस लेने के लिए आंबेडकराईट पार्टी ऑफ इंडिया अन्य सामाजिक और राजनीतिक संगठनों के साथ में मिलकर 20 जुलाई 2018 को प्रातः 11:00 बजे कलेक्ट्रेट सर्किल जयपुर में एक धरना और प्रदर्शन कर रही है .इस धरना और प्रदर्शन के माध्यम से सरकार को विजय मानकर द्वारा तैयार किया हुआ चार्टर इन केसों को वापस लेने के संदर्भ में दिया जाएगा। साथ ही सरकार को अल्टीमेटम दिया जाएगा कि जितनी जल्दी हो सके ,यह केस वापस ले लें अन्यथा आने वाले समय में एक व्यापक और बड़े स्तर पर जन आंदोलन पूरे राजस्थान में किया जाएगा और इस दौरान यदि कानून व्यवस्था बिगड़ती है. किसी प्रकार की अव्यवस्था होती है तो उस अव्यवस्था की तमाम जिम्मेदारी राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और उसके प्रशासन की होगी। इस आंदोलन में सबसे ज्यादा प्रभावित जिले बाड़मेर, सीकर ,अलवर ,नागौर ,अजमेर, जालौर ,करौली ,जोधपुर, भरतपुर ,जयपुर तथा और भी अन्य जिलों की फाइंडिंग रिपोर्ट के आधार पर निम्न बिंदु उभरकर सामने आए हैं उनका विवरण इस प्रकार से हैं
1 – भारत के इतिहास में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग द्वारा अपने अधिकारों एवं स्वाभिमान के लिए यह पहला अवसर था जब लाखों की संख्या में बिना किसी नेतृत्व के किसी संगठन विशेष के बैनर का उपयोग किए बिना क्षेत्रीय स्तर पर स्त्री पुरुषों ने शांतिपूर्वक तथा बाबा साहब डॉक्टर बी आर अंबेडकर के संवैधानिक कानून अधिकारों को ध्यान में रखते हुए संबंधित पुलिस अधिकारियों तथा जिला प्रशासन को पूर्व में सूचना देते हुए स्वीकृति प्राप्त कर 2 अप्रैल 2018 को सवेरे 7:00 बजे से दिन के दो-तीन बजे तक जुलूस रैली निकाली।
2 – पुलिस प्रशासन को पूर्व सूचना के बावजूद भी पर्याप्त पुलिस बल की उचित  तैनातगी नहीं कर बंद को हल्के में लिया, जबकि अंबेडकराईट पार्टी ऑफ इंडिया के प्रदेश प्रभारी डॉ दशरथ हिनूनिया ने पुलिस महानिदेशक और सभी जिलों के पुलिस अधीक्षकों को पूर्व में लेटर लिखकर इस बात की सूचना दी थी कि एक बड़ा जन आंदोलन 2 अप्रैल 2018 को SC ST जन समुदाय द्वारा प्रिवेंशन ऑफएट्रोसिटीज एक्ट 1989 के संदर्भ में किया जा रहा है। जिसका निश्चित नतीजा यह रहा कि अन्य संगठनों एवं वर्गों के असामाजिक तत्व एवं बदमाश किस्म के व्यक्तियों ने सुनियोजित तरीके से जुलूस रैली में घुसकर कानून व्यवस्था को धता बताते हुए तोड़फोड़ एवं पत्थरबाजी का कृत्य किया, गोलियां चलाई आगजनी की तथा पुलिस तमाशबीन की रूप में खड़ी देखती रही । खैरथल, अलवर, बाड़मेर, नीमकाथाना आदि कई स्थानों पर पुलिस अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों के घरों के दरवाजे तोड़कर घरों में घुसकर निर्ममता से मारपीट की गई यहां तक की महिलाओं को भी नहीं बख्शा गया पुलिस प्रशासन ने अपनी इस नाकामी को छुपाने के लिए दोपहर बाद में सैकड़ों एससी एसटी वर्ग के स्त्री-पुरुषों पर गोलियां चलाई बेरहमी से सड़कों पर पीटा,  पुलिस हिरासत में मारपीट कर हाथ पांव तोड़ दिए गए पकड़े गए लोगों के विरुद्ध एवं उनको गंभीर परिणाम परिणामों की धमकियां देकर मजबूर कर पूछ पूछ कर हजारों निर्दोष लोगों के विरुद्ध मुकदमा दायर कर गैरजमानती धाराएं लगाई गई जो आज से पहले कई बार भारत या राजस्थान बंद के दौरान हुए खूनी दंगों करोड़ों की सरकारी संपत्ति को पहुंचाएं गये नुकसान, परिवहन व्यवस्था कई सप्ताह तक बंद व अस्त व्यस्त रही, दर्जनों लोग मारे गए  तब भी   ऐसी धाराएं नहीं लगाई गई थी । पुलिस प्रशासन का स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह पक्षपातपूर्ण एवं निर्मम कृत्य देश के शोषित वंचित वर्ग को परेशान करने वाला निंदनीय तथा अन्याय पूर्ण हैं।
3-  इस आंदोलन में यह भी स्पष्ट हुआ कि पुलिस प्रशासन का जिला प्रशासन से कोई तालमेल नहीं था पुलिस ने मनमाने तरीके से गोलीबारी एवं लाठीचार्ज किया खैरथल अलवर में कृषि मंडी तथा पुलिस स्टेशन के सामने पुलिस ने गोलियां चलाई जिस में पवन नाम के एक युवक की सिर में गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई अन्य दो व्यक्ति शेर सिंह व सुरेश गंभीर रूप से घायल हुए मौका देखने से यह स्पष्ट होता है कि पुलिस द्वारा की गई फायरिंग औचित्य हीन आधारहीन अनावश्यक थी यह भी उल्लेखनीय है कि फायरिंग के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर  (s o p) की पालना भी नहीं की गई।
4 – हमारी जांच रिपोर्ट में यह तथ्य भी सामने आया कि दोपहर 2:00 बजे तक एक दो स्थानों को छोड़कर पूरे प्रदेश में कहीं पर भी कोई अप्रिय घटना नहीं हुई दोपहर बाद जुलूस के विसर्जन के वक्त असामाजिक तत्वों की घुसपैठ के बाद ही नियोजित एवं षड्यंत्र पूर्वक अचानक पत्थरबाजी व तोड़फोड़ की घटनाएं घटित हुई । यदि जुलूस में शामिल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के लोगों का तोड़फोड़ व आगजनी में करने का इरादा होता तो वह सवेरे से ही ऐसा घटना क्रम प्रारंभ कर देते लेकिन इस प्रकार की कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई है इससे साबित होता है कि जुलूस या रैली में शामिल एससी एसटी वर्ग के लोगों ने शांतिप्रिय तरीके से अपनी रैली निकाली थी एवं उनका बंद के दौरान किसी भी अप्रिय घटना से कोई संबंध नहीं था।
5- अलवर, डेगाना, खैरथल,, गंगापुर सिटी अजमेर के हिस्ट्रीशीटर इस बंद के दौरान पुलिस की जानकारी एवं उपस्थिति में गोलीबारी एवं आगजनी करते रहे पुलिस ने सिर्फ मूकदर्शक बनी रही बल्कि थाने में दर्ज ऐसे लोगों के खिलाफ FIR में अब तक किसी प्रकार की कार्यवाही तक नहीं की गई थानाधिकारी एनिमी अलवर श्री देवेंद्र प्रताप की उपस्थिति में गोलू उर्फ दीपक पहलवान ने अपने मकान की छत से जुलूस को लक्षित कर गोलियां चलाई जिस से 4 लोग घायल हुए इस बाबत FIR 220 पब्लिक 2018 दर्द है पर पुलिस द्वारा अभी तक भी आरोपी पर कोई कार्यवाही नहीं की गई ज्ञात हुआ है कि गोलू एल्बम थाना अधिकारी देवेंद्र प्रताप पुलिस अधीक्षक राहुल प्रकाश राजनीतिज्ञों का संरक्षण प्राप्त है जिसकी पुष्टि उसके द्वारा उपयोग में ली जाने वाली सरकारी पर विधायक की प्लेट देखी जाने की जानकारी भी मिली है डेगाना कस्बे में स्थानीय विधायक एवं सहकारिता मंत्री अजय सिंह किलक 2 अप्रैल 2018 को पूरे दिन कस्बे में भी मौजूद रहे माननीय मंत्री महोदय इच्छाशक्ति दिखाते तथा निष्पक्ष रहते हुए दोनों पक्षों से वार्ता करते तो उनके क्षेत्र में हुई अप्रिय घटनाओं से बचा जा सकता था लेकिन अफसोस की बात है कि उन्होंने दोपहर बाद डेगाना बाजार का अपने समर्थकों के साथ भ्रमण किया परंतु उस स्थान पर नहीं गए जहां अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों की 18 मोटरसाइकिल एवं दो कार्य जला दी गई थी थाना क्षेत्र के बदमाश नरसीराम जिंदा प्रकाश शुक्ला राजेंद्र नई जो कि शराब तस्कर है बंद के दौरान सक्रिय रुप से दुकानदारों को उकसाते पाए गए लेकिन अज्ञात कारणों से पुलिस द्वारा उनके विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की गई।
गंगापुर सिटी विधायक  मान सिंह गुर्जर ने बंद की पूर्व संध्या पर खुले रुप से बंद के आयोजकों को नतीजे भुगतने की चेतावनी दी तथा जनता को संबोधित करते हुए कहा कि आप निश्चिंत रहिए 1 घंटे में फंसाने वाली है फिर आप देखना कि सुबह तक हम इनका क्या हाल करते हैं।
पुष्कर विधायक व संसदीय सचिव सुरेश रावत ने भूणाभाय गांव में अपने रिश्तेदार श्री रवि सिंह रावत से पूर्व विधायक पूर्व सभापति डॉक्टर एवं संभ्रांत 10 लोगों के खिलाफ डकैती का मुकदमा दर्ज करवाया तथा सिविल लाइन थाना अधिकारी करण सिंह तथा पुलिस उपाधीक्षक अजमेर शहर दुर्ग सिंह राजपुरोहित द्वारा बंद समर्थकों के विरुद्ध दमनात्मक कार्यवाही करने पर जोर देते रहे एवं स्वयं भी शहर में दौरे पर रहे।
किशनगढ़ (अलवर ) विधायक रामहेत यादव ने खेरथल थाना अधिकारी जितेंद्र यादव की मदद से अनुसूचित जाति समाज के लोगों को सबक सिखाने का आवाहन करने की सूचना मिली क्योंकि इस बिंदु में वर्णित आरोप जनप्रतिनिधियों पुलिस अधिकारियों से संबंधित है अतः संदर्भित जनप्रतिनिधियों पुलिस अधिकारियों के फोन की 1 से 3 अप्रैल, 2018 की कॉल डिटेल निकाली जाकर जांच की जानी चाहिए ताकि सरकार तथा जनता के सामने सच्चाई लाई जा सके।
6 – पुलिस ने अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के ऐसे लोगों के खिलाफ मुकदमे दर्ज किए जो वर्षों पहले मर चुके हैं जैसे रूपवास जिला भरतपुर थाने की FIR 53/ 2018 के क्रमांक 11, 14, 20 पर अंकित फूल सिंह, जगत सिंह उर्फ जगनी, विजय सिंह को मरे हुए कई वर्ष हो गए हैं।  क्रमांक 58 पर अंकित  विशन सिंह जो सिलिकोसिस की बीमारी से पीड़ित है तथा वर्षों से बिस्तर पर पड़े हुए हैं, को भी दंगाइयों में शामिल कर लियागया। नीमकाथाना सीकर की FIR 112 / 2018 के क्रम 3 पर रोशन मुंडोतिया का नाम दर्ज है । उसी दिन जयपुर के गांधीनगर थाना की FIR 214/2018 में सबसे ऊपर इसी रोशन को जुलूस को नेतृत्व देने का चार्ज लगाकर FIR दर्ज की गई । खैरथल पुलिस थाने में FIR 87/ 2018 में उल्लेखित अमृत नाम के व्यक्ति की लगभग 6 महीने पूर्व मृत्यु हो चुकी है तथा क्रमांक 157 पर सूरजभान कछवाहा रायपुर जाटान नाम का नाम दर्ज किया गया है इस नाम का कोई व्यक्ति रायपुर जाटान में है ही नहीं। 8 बच्चों को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया जो कि नाबालिग है पुलिस बल की उपस्थिति में हिंडोन में पूर्व मंत्री भरोसीलाल जाटव का आवास जला दिया गया एवं उन्हें कस्बा छोड़ना पड़ा वर्तमान विधायक के घर के कोने में भी आग लगाई जा कर दिखाव किया गया है।
घटना के 12 दिन बाद अजमेर पुलिस आकाश वाल्मीकि को आर्म्स एक्ट लगाकर इसलिए गिरफ्तार करती है कि बंद के दौरान उसके हाथ में तलवार थी ठीक उन्हीं दिनों जयपुर के खोनागोरियान थाना अधिकारी को पुलिस उपायुक्त की उपस्थिति में परशुराम जयंती के समर्थकों से इसलिए सार्वजनिक माफी मांगनी पड़ी क्योंकि थानाधिकारी ने ईमानदारी व कर्तव्य परायणता से जुलूस में चलने वाले लोगों के हाथों में तलवार लाठी में बंदूक लेकर चलने से मना कर दिया क्योंकि इससे कानून व्यवस्था बिगड़ सकती थी पुलिस किस प्रकार की कार्य शैली को क्या कहा जाए जो हैरान करने वाली है पुलिस का यह निरंकुशता स्पष्ट करता है कि उन्होंने वास्तविकता को छुपाते हुए आगजनी तोड़फोड़ पत्थरबाजी में शामिल असामाजिक तत्वों को बचाते हुए निर्दोष एवं मौके पर उपस्थित लोगों को जबरदस्ती आरोपी बना दिया इनमें प्रमुख रुप से स्कूल व कॉलेज में जाने वाले विद्यार्थी हैं तथा सरकारी कर्मचारी है या वे लोग हैं जो समाज को दिशा देने के लिए अपनी सकारात्मक व रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए जाने जाते हैं यह कार्रवाई इस बात को बल देती है कि पुलिस प्रशासन गुंडे-बदमाशों हिस्ट्रीशीटर को साथ लेकर तथा राजनीतिज्ञों के ड्रेस का पूर्ण इशारे पर जैसा कि ऊपर वर्णित किया गया है अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के निर्देश एवं इंसाफ पसंद लोगों को सबक सिखाने की दृष्टि से बिना विवेक का इस्तेमाल किए बिना सच्चाई जाने सैकड़ों लोगों को हवालात में ड्रेस का पूर्ण कृत्य किया है ।
7- पुलिस की अपरिमित ज्यादतियों से एससी एसटी वर्ग को पुलिस पर से विश्वास टूट गया है झूठे मुकदमे में फंसाया गया व्यक्ति इस बात से हैरान है की उन्हें अपने घरों से गिरफ्तार किया गया इन लोगों की उच्च न्यायालय तक जमानत नहीं हो पा रही थी।
8 – एससी एसटी वर्ग के लोग अपने वाहनों को एक स्थान पर खड़े कर जब रैली जुलुस में व्यस्त थे तब समाजकंटकों हिस्ट्रीशीटरों तथा असामाजिक तत्वों ने पीछे से SC ST वर्ग के इन लोगों के सैकड़ों वाहन जला दिए तथा क्षतिग्रस्त कर दिए।  इनकी लाखों की संपत्ति का नुकसान किया गया तथा इस संबंध में कोई मुआवजा नहीं दिया गया, इस बाबत पुलिस ने वाहन मालिकों की तरफ से एक भी FIR दर्ज नहीं की इन वाहनों की सुरक्षा की जिम्मेदारी पुलिस प्रशासन की थी परंतु पुलिस प्रशासन के पास जले हुए एवं तोड़ फोड़ किए हुए वाहनों का कोई विवरण नहीं है थाना डेगाना में 18, आहोर में लगभग 65, रानीवाड़ा हिंडौन में 20 मोटरसाइकिल आग के हवाले कर दी गई, जिनका मलबा पुलिस थाने में रखा हुआ है।  आहोर थाना अधिकारी द्वारा समस्त 65 जली हुई मोटरसाइकिल लों को नाली में फेंक दिया गया है। डेगाना में जलाई गई एक Bolero बाड़मेर में चार Bolero का मलबा काफी समय तक पड़ा रहा है । पुलिस को अपने व जनता की तो चिंता है परंतु गरीब निर्दोष व्यक्तियों के बारे में किसी प्रकार की चिंता नहीं है वह ना ही इस बारे में प्रस्तुत प्रार्थना पत्र पर कार्यवाही करने में इच्छाशक्ति दिखाई है जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। सांचौर में दो अप्रेल के दिन पुलिस ने मेघवाल धर्मशाला में स्थित छात्रावास में घुसकर 32 कमरों के दरवाजे खिड़किया तोड़ी गई। अध्यनरत छात्रों को जबरदस्ती बुरी तरह पीटा गया। झूठे मुकदमें बना कर पकड़ा गया। छात्रावास में गोलीया भी चलाई गई। एक अध्यापक नेमीचंद खोरवाल का हाथ तक तोड दिया। 12 अध्यनरत छात्रो को जेल भेजा गया। अमृतलाल मेघवाल सुंथडी, निकुल कुमार मेघवाल, दुष्यंत कुमार, श्रवण मेघवाल, महेन्द्र हाडतेर, अर्जुन डांगरा, हस्ताराम लाछड़ी, प्रवीण मेघवाल, नरपत, अवतार सिंह को जेल भेजा गया। इनमें से अधिकतर छात्र B.S.C के छात्र थे जो फेल हो गये। पुलिस ने इनका जीवन तक खराब कर दिया। इन छात्रो को बडी बेहरेमी से पीटा गया।
9 -पुलिस प्रशासन ने SC ST में भय उत्पन्न करने के उद्देश्य से कई स्थानों पर दबिश देकर धरपकड़ की थी। यहां तक कि बाड़मेर पुलिस ने विशेष टीम भेजकर दो व्यक्तियों लक्षमण वडेरा व उदाराम मेघवाल को दिल्ली से पकड़कर लाई जैसे कि यह लोग कोई आतंकवादी हो । दिनांक 1 मई 2018 को अलवर में आंदोलन से जुड़े सूरजमल कर्दम को गिरफ्तार कर इस बात को सिद्ध किया इस प्रकार की घटनाएं SC ST वर्ग में न सिर्फ चिंता तथा भय का माहौल पैदा करती है बल्कि पुलिस की इस प्रकार पक्षपात पूर्ण रुप से की गई कार्रवाई उसे शासन के प्रति विश्वास पर भी प्रश्न चिन्ह लगाती है और जनता में शासन के खिलाफ आक्रोश वह नाराजगी भी पैदा करती है जो आने वाले समय में सामाजिक सामंजस्यता एवं राजनीतिक रूप से अहितकर प्रतीत होती है।

 इन सभी तथ्यों को ध्यान में रखते हुये 20 जुलाई 2018 को राजस्थान की राजधानी जयपुर में  स्थान:  कलेक्ट्रेट सर्किल जयपुर, समय:  प्रातः 11:00 बजे,दिनाँक: 20 जुलाई, 2018 धरना प्रदर्शन किया जा रहा है .

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