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नाटक की सार्थकता उसके पढ़े जाने में नहीं, उसके देखे जाने में : असग़र वजाहत

(प्रो. असग़र वजाहत) हिन्दू कालेज में वेबिनार - दिल्ली। नाटक पढ़ने की चीज नहीं है, वह देखे जाने की चीज है। नाटक

राष्ट्रीय युवा दिवस पर मेरी स्वरचित कविता ” 21 वीं सदी का युवा ” पढ़िए…

( राजमल रेगर ) "21 वी सदी का युवा "  में 21वी सदी का युवा देख रहा हूँ, सामाजिक कार्यकर्ताओं के जेलों मेंभरे

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